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सामाजिक सरोकार: बिना दहेज की वो ऐतिहासिक बारात जिसने पूरे जिले की सोच बदल दी (संध्या संस्करण • 13 अक्टूबर 2026)

मंडप में जब लड़की के पिता से शगुन के नाम पर भारी रकम मांगी गई, तब दूल्हे और दुल्हन के एक फैसले ने मिसाल कायम कर दी...

मनोहर कहानियां सम्पादकीय डेस्क
12 अक्टूबर 2026
6 मिनट की कहानी
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सामाजिक सरोकार: बिना दहेज की वो ऐतिहासिक बारात जिसने पूरे जिले की सोच बदल दी (संध्या संस्करण • 13 अक्टूबर 2026)
सामाजिक सरोकार: बिना दहेज की वो ऐतिहासिक बारात जिसने पूरे जिले की सोच बदल दी (संध्या संस्करण • 13 अक्टूबर 2026)

सजे हुए मंडप में अचानक उठा विवाद

शादी की रस्में चल रही थीं और पूरा पंडाल मेहमानों से भरा था। तभी कुछ रिश्तेदारों के उकसावे में आकर वर पक्ष के बड़े बुजुर्गों ने लड़की के पिता के सामने नई गाड़ी की शर्त रख दी।

दुल्हन का स्वाभिमान और युवा इंजीनियर दूल्हे का स्टैंड

अपनी बेटी के पिता की झुकी हुई आंखें देखकर दुल्हन ने तुरंत आगे बढ़कर कहा कि जहां सम्मान से बड़ा लालच हो, वहां रिश्ता नहीं जुड़ सकता। तभी युवा इंजीनियर दूल्हे ने सबके सामने अपने ही परिवार के लालची रिश्तेदारों को फटकार लगाई।

संविधान की शपथ और केवल एक रुपये के शगुन में विवाह

दूल्हे ने दहेज की हर शर्त को ठुकराते हुए केवल एक नारियल और सम्मान के साथ विवाह संपन्न किया, जिसकी सराहना पूरे समाज और प्रशासन ने की।

संपादकीय दृष्टिकोण (SWEN Stories Daily Desk — 13 अक्टूबर 2026)

दहेज प्रथा समाज पर एक कलंक है; युवा पीढ़ी का जागरूक और साहसी कदम ही स्वस्थ समाज का निर्माण करता है।

पाठक प्रतिक्रिया2 समीक्षाएं
5.0
र
राजेश कुमार वर्मा• २ घंटे पहले
#सटीक विश्लेषण

बहुत ही स्पष्ट और तथ्यपरक रिपोर्टिंग। निष्पक्ष जानकारी साझा करने के लिए संपादकीय टीम को धन्यवाद।

ड
डॉ. अंकिता शर्मा• ५ घंटे पहले
#ज्ञानवर्धक

इस तरह के गहन और प्रमाणिक विश्लेषण की आज डिजिटल युग में बहुत ज़रूरत है। SWEN Media का प्रयास सराहनीय है।