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डिजिटल अरेस्ट का चक्रव्यूह: जब फर्जी आईपीएस बनकर साइबर ठगों ने 80 घंटे तक बंधक बनाया

सुप्रीम कोर्ट और सीबीआई के फर्जी लेटरहेड, स्काइप पर सजी नकली पुलिस चौकी और एक रिटायर्ड अधिकारी की ज़िंदगी भर की गाढ़ी कमाई लूटने का सनसनीखेज डिजिटल षड्यंत्र...

मनोहर कहानियां सम्पादकीय डेस्क
10 अक्टूबर 2026
6 मिनट की कहानी
सत्यापित रिपोर्ट (Verified)
डिजिटल अरेस्ट और साइबर फ्रॉड की सच्ची कहानी
डिजिटल अरेस्ट और साइबर फ्रॉड की सच्ची कहानी

सुबह की वो मनहूस कॉल और दहशत का आगाज

मंगलवार की सुबह दस बजे जब रिटायर्ड बैंक मैनेजर सुरेंद्र नारायण के मोबाइल पर घंटी बजी, तो स्क्रीन पर कोई साधारण नंबर नहीं था। सामने से एक सख्त आवाज गूंजी— 'हम टेलीकॉम रेगुलेटरी और मुंबई क्राइम ब्रांच से बोल रहे हैं। आपके आधार कार्ड से जारी सिम कार्ड का इस्तेमाल अंतरराष्ट्रीय मनी लॉन्ड्रिंग में हुआ है।'

स्काइप पर सजी नकली पुलिस चौकी

सुरेंद्र बाबू अभी संभल भी नहीं पाए थे कि उन्हें वीडियो कॉल पर आने का हुक्म दिया गया। स्क्रीन ऑन होते ही उनकी आंखें फटी रह गईं। पीछे पुलिस स्टेशन का बोर्ड, दीवार पर पुलिस का लोगो, वायरलेस सेट की आवाजें और सामने खाकी वर्दी में दो वर्दीधारी बैठे थे जिनके सीने पर आईपीएस बैच चमक रहा था।

ठगों ने स्क्रीन पर सुप्रीम कोर्ट और सीबीआई की सील लगा एक कथित 'अरेस्ट वारंट' दिखाया। उन्हें धमकाया गया कि अगले 80 घंटे तक उन्हें कमरे से बाहर नहीं निकलना है, फोन चालू रखना है और किसी को भी इसकी भनक नहीं लगनी चाहिए। इसे उन्होंने नाम दिया— 'डिजिटल अरेस्ट'।

अकाउंट खाली करने की साजिश और पर्दाफाश

मानसिक दबाव और गिरफ्तारी के खौफ में सुरेंद्र बाबू टूट चुके थे। ठगों ने कहा कि उनके बैंक खातों की 'सरकारी ऑडिट' होगी, इसलिए तुरंत उनके दिए हुए 'वेरीफिकेशन अकाउंट' में पेंशन फंड के 45 लाख रुपये ट्रांसफर करने होंगे। जब पैसे ट्रांसफर हो गए, तो अचानक वीडियो कॉल डिस्कनेक्ट हो गया और फोन नंबर स्विच ऑफ आने लगे। जब वे बदहवास हालत में साइबर सेल पहुंचे, तब यह अंतरराष्ट्रीय सिंडिकेट उजागर हुआ।

पाठक प्रतिक्रिया2 समीक्षाएं
5.0
र
राजेश कुमार वर्मा• २ घंटे पहले
#सटीक विश्लेषण

बहुत ही स्पष्ट और तथ्यपरक रिपोर्टिंग। निष्पक्ष जानकारी साझा करने के लिए संपादकीय टीम को धन्यवाद।

ड
डॉ. अंकिता शर्मा• ५ घंटे पहले
#ज्ञानवर्धक

इस तरह के गहन और प्रमाणिक विश्लेषण की आज डिजिटल युग में बहुत ज़रूरत है। SWEN Media का प्रयास सराहनीय है।