मनोहर कहानियां विशेषांकहाइवे पर लावारिस ब्रीफकेस: जासूस विक्रम और फॉरेंसिक फिंगरप्रिंट का वो 48 घंटे का रहस्य
रात के दो बजे जीटी रोड पर मिले एक लावारिस ब्रीफकेस में मिली डायरी ने पुलिस को दिल्ली से दुबई तक फैले एक रहस्यमयी सिंडिकेट की चौखट पर ला खड़ा किया...
जीटी रोड की वो धुंध भरी रात
दिसंबर की कड़ाके की ठंड और नेशनल हाइवे 44 पर गहरा कोहरा। पेट्रोलिंग वैन के हेडलाइट्स की रोशनी में सड़क किनारे झाड़ियों के पास एक चमड़े का भारी ब्रीफकेस पड़ा दिखा। उस पर खून के सूखे छींटे थे और एक अजीबोगरीब ताला लगा था।
ब्रीफकेस के अंदर की खौफनाक दुनिया
जब बम डिस्पोजल स्क्वॉड और फॉरेंसिक एक्सपर्ट्स ने ब्रीफकेस खोला, तो उसमें न तो कोई विस्फोटक था और न ही नकदी। उसमें मौजूद थी एक अधजली लाल डायरी, एक एन्क्रिप्टेड यूएसबी ड्राइव और सोने का एक पुराना कंगन जिस पर एक अधूरा नाम खुदा था— 'अवनि...'।
फॉरेंसिक फिंगरप्रिंट का वो निर्णायक सुराग
विशेष जासूस विक्रम ने जब ब्रीफकेस के हैंडल पर चिपके अदृश्य फिंगरप्रिंट्स को यूवी लाइट में स्कैन किया, तो सेंट्रल डेटाबेस में एक ऐसी पहचान मिली जिसे पुलिस पांच साल पहले मृत मान चुकी थी। शुरू हुआ 48 घंटे का वह सांसें रोक देने वाला ऑपरेशन जिसने अंतरराष्ट्रीय स्मगलिंग रिंग को बेनकाब कर दिया।
बहुत ही स्पष्ट और तथ्यपरक रिपोर्टिंग। निष्पक्ष जानकारी साझा करने के लिए संपादकीय टीम को धन्यवाद।
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